बटवारा

Posted 5/11/2018

मेरे देश का फिर बटवारा हो रहा है 
सैंतालीस में मुद्दा ज़मीन थी 
आज कल जंग है यकीन की 
इक अंधा सा जोश सर पानी हो चला है 

आज की अदालत प्रचार माध्यम हैं 
जूरी जन्ता और हर घर अदालत है 
अपने यकीं को लिए हर शक़्स 
कटघरे के दोनों तरफ खड़ा है 

आज़ादी बोलने की पुरज़ोर आज़मातें हैं 
शब्दों के वार का अजब सिलसिला है 
बोल-चाल में सब्र कहीं ग़ुम हो गया है 
दो बाटन के बीच मेरा मुल्क पिस रहा है 

ख़ेमे बटे हुए हैं रंगों के चहुँ ओर 
कहीं भगुआ तो कहीं हरे की लग रही है होड़ 
मेरे देश का फिर बटवारा हो रहा है
इक अंधा सा जोश सर पानी हो चला है