धुन

Posted 6/29/2018

अनसुनी सी एक धुन है

लफ़्ज़ जिसमें गुम हैं

सुर उसके सासों से सजते हैं
और देती धड़कनें ताल हैं

दबी हुई थी कहीं वो सालों से
जाने किस पल के इंतेज़ार में

ख़ुद से ख़ुद बेख़बर हो के 
मानो कुछ ढूँड़ रही थी फ़िलहाल में

एकाएक दिल के ढोल जब बजने लगे
सहमे सुस्त पड़े पैर थिरकने लगे

होंठ बजाने लगे जब यूँ ही सीटियाँ
हाथ दोनों जब स्वयं लगे देने तालियाँ

लय बन लहर दौड़ गई है जो 
जीवन को जीवन्त कर रही है वो

हर तान से एक नई तरंग जो उठती है 
इश्क़ नाम है धुन का - वही ज़िंदगी है

अनसुनी सी एक धुन है
लफ़्ज़ जिसमें गुम हैं