मौक़ा

Posted 3/25/2019

क्यों परेशान से दिखते हैं लोग हर तरफ़
आख़िर है क्या इस बेचैनी का सबब
इतनी दुनिया में दुनिया से नाराज़गी क्यों है भला
छोटी छोटी बातों पे क्यों ख़ून उबलने है चला
तेरे मेरे का फ़ासला तो पहले भी कम न था
मगर इतनी नफ़रत ऐसा रंज-ओ-ग़म न था

कुछ तो होगा इलाज कोई तो होगी दवा
मिल के फूकेंगे तो शायद चलेगी बदलेगी हवा
कहाँ इतिहास में सियासतदारों ने अमन की राह चुनी है
एहतराम और मोहब्बत के धागों ने इस देश की चादर बुनी है
निकलेगी आवाम घर से तो कुछ तो हालात बदल पायेंगे
वरना यूँ बोलते बोलते तो फिर से पाँच साल बीत जायेंगे

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