parichay

Posted 4/23/2015

आज धूल चटी किताबों के बीच

ज़िन्दगी का एक भूला पन्ना मिल गया

धुँधले से लफ़्ज़ों के बीच
पहचाना सा एक चहरा खिल गया

अलफ़ाज़ पुराने यकायक जाग उठे
मानो सार नया  कोई मिल गया
दो पंक्तियों के चंद लमहों में
एक पूरा का पूरा युग बीत गया

 

आज धूल चटी किताबों के बीच

मुझ को मैं ही मिल गया