विश्वास का दीया

Posted 5/28/2019

खुली हवा है वो आज़ादी की
शीतल करे जो जब मध्धम चले
एक ओर जो हो हावी तो बने आँधी
कैसे तूफ़ानों में कोई दीया जले

अलगाव की चिंगारी कहीं दामन ना लगे
मिल के बढ़ने के लिए दिल भी बड़े रखने होंगे
दूर अभी हैं वो मंज़िलें जहाँ ख़ुशहाली मिले
कटे तने से चलने से कैसे ये रास्ते तय होंगे

इरादे नेक वही जो अमल में आएँ
कथनी और करनी को अब मिलाना है
तेरे मेरे के ये फ़ासले चलो मिल मिटाएँ
विश्वास लेना देना नहीं कमाना है

FB

Twitter

Instagram

YouTube